Close Menu
    What's Hot

    ऐतिहासिक व्यक्तित्वों में व्यक्तित्व विकार के संकेत: एक शैक्षिक गाइड

    Sponsor: Ankit TiwariJuly 23, 2025

    ग़ाज़ियाबाद के लोहिया नगर में स्थित शुभारंभ द लर्निंग स्कूल ने अपनी पहली वर्षगांठ के उपलक्ष में भव्य उत्सव आयोजित किया

    April 14, 2025

    जिला युवा कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित

    April 14, 2025
    Facebook X (Twitter) Instagram
    India Raftaar – Bringing News From India
    • India
    • Science
    • News
    • Politics
    • Exam
    • World
    • Money
    • Travel
    • Food
    • Economy
    • Sports
    • Tech
    • Movie
    Facebook X (Twitter) Instagram
    India Raftaar – Bringing News From India
    Home»News»श्रीराम कथा में बाल स्वरूप से राम भक्त हुए अभिभूत
    News

    श्रीराम कथा में बाल स्वरूप से राम भक्त हुए अभिभूत

    Sponsored By: Ankit Tiwari October 3, 2024No Comments9 Mins Read
    Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email

    दिनांक 2 अक्टूबर, 2024 को हिंदी भवन, लोहिया नगर, गाज़ियाबाद में परम पूज्य डॉ. पवन सिन्हा गुरुजी के सान्निध्य में उनके आशीष वचनों के साथ पूजनीया श्री गुरुमाँ डॉ. कविता अस्थाना जी द्वारा श्री राम लला के बाल स्वरूप की कथा का प्रारंभ हुआ। यह कथा अनेक अर्थों में महत्वपूर्ण है श्री राम जी के जन्म के बारे में प्रामाणिक जानकारी प्राप्त होना और उनके जीवन से जुड़े अनेक प्रसंगों की सत्यता के बारे में जानना। समाज का एक वर्ग ऐसा भी है जो श्री राम को मिथ, मिथक या कल्पित व्यक्ति मानता है। लेकिन यह भ्रांति है और कुछ लोग जानबूझकर ऐसी भ्रांति फैला रहे हैं जिससे सनातन संस्कृति की हानी होती है। श्रीराम जी के जीवन के अनेक प्रश्नों के उत्तर देने वाली यह कथा बताती है कि श्रीराम जी जन्म कब हुआ था? क्या सच में माँ सीता का स्वयंवर हुआ था? श्री राम जी द्वारा धनुष तोड़े जाने की क्या कथा है? परशुराम जी जब शिव धनुष के टूट जाने पर कुपित हुए तो श्री राम जी ने क्या किया? क्या वे चुपचाप अपने पिता यानी राजा दशरथ का अपमान सहन करते रहे? नहीं, ऐसा कुछ नहीं हुआ था! राम कथा ने जन समुदाय में फैली भ्रांतियों को समाप्त करने का कार्य किया और धर्म की स्थापना, सनातन संस्कृति के संरक्षण का कार्य किया।श्रीराम जी के भजनों एवं दीप प्रज्वलन से राम कथा का शुभारंभ हुआ और आयोजकों द्वारा व्यासपीठ पर शोभायमान महिमा वाचक आदरणीय गुरु माँ डॉ. कविता अस्थाना जी का तिलक वंदन कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।इसके उपरांत परम पूज्य प्रो. पवन सिन्हा गुरुजी ने अपने आशीष वचनों से सभी को अनुगृहीत किया और आयोजकों को बधाई दी कि ऐसे समय में जब श्री राम जी की अस्मिता, उनके सत्य होने पर ही अनेक प्रश्न चिह्न लगाए जा रहे हैं, ऐसे समय में राम कथा का आयोजन किया गया। श्री गुरुजी ने अपने संभाषण में विष्णु अवतार और सनातन संस्कृति के वाहक श्री राम जी के जीवन से बहुत कुछ सीखने के लिए प्रेरित किया और यह संकेत भी दिया कि आज का युवा जन श्री राम जी को केवल और केवल राम-रावण युद्ध और सीता माँ के स्वयंवर के साथ ही जोड़कर देखता है। उस युवा वर्ग ने कभी श्री राम कू सही से जाना ही नहीं है। बस उतना भर जाना और वैसा ही जाना जैसा टीवी धारावाहिकों में दिखाया जाता है। श्री राम जी के बारे में असत्य, झूठ और भ्रम फैलाने वाले सोश्ल मीडिया से बचने की आवश्यकता है। अपने भगवान को जानना है तो शास्त्र पढ़ने होंगे, अपने प्राचीन ग्रंथ पढ़ने होंगे तब हम समझ सकेंगे कि अंततः श्री राम कौन हैं और क्या हैं? वस्तुतः वे सत्य हैं, इतिहास पुरुष हैं और धर्म की स्थापना के लिए धरती पर जन्म लेते हैं। आज की रामकथा में ये सभी तथ्य उजागर होंगे।इसके उपरांत परम पूजनीया श्री गुरुमाँ डॉ. कविता अस्थाना जी ने श्रीराम जी के बाल जीवन के हर सूक्ष्म से सूक्ष्म रहस्यों को उजागर करते हुए श्रीराम कथा प्रारंभ की और यह बताया कि मेरी इस कथा का आधार श्रीवाल्मीकिकृत रामायण है न कि श्री तुलसी द्वारा रचित राममचरितमानस! इसका कारण है कि श्री वाल्मीकि जी श्री दशरथ जी के मित्र थे और श्री राम जी के समकालीन थे। श्री वाल्मीकि जी ने सीता माँ को अपने आश्रम में आश्रय दिया था इसलिए वे इस कथा के साक्षी भी हैं। वाल्मीकिकृत रामायण को आधार इसलिए भी लिया गया है क्योंकि श्री राम हमारे पूजनीय तो हैं ही, इसके साथ-साथ वे इतिहास के प्रतीक हैं।

    जब भी भारत वर्ष का नाम आता है तो उसके साथ श्री राम का नाम आता ही आता है। तो इसलिए हमें इतिहास की दृष्टि से श्री राम को जानना चाहिए जिससे हम अपने भगवान को अच्छे से भज भी सकें और जब युवा जन हमसे प्रश्न करे तो हमें उनके उत्तर भी मालूम होने चाहिए। वाल्मीकिकृत रामायण उस समय का इतिहास, समाज का वर्णन भी करती है लेकिन उसकी शैली काव्यात्मक है इसलिए संभवतः हम उसे इतिहास में शामिल नहीं करा पाए। यह पीड़ा घोर कष्ट देती है। इसलिए हमारे भगवान श्री राम माइथोलॉजी बनकर रह गए जबकि ऐसा नहीं है! श्रीराम सत्य हैं और इतिहास पुरुष हैं। अपनी कथा में वे आगे राजा दशरथ के राज्य, नगर व्यवस्था और प्रजा के सरल एवं शिष्ट स्वभाव, व्यवहार की भी चर्चा करती हैं।वे अपनी कथा में यह भी स्पष्ट करती हैं कि श्री राम जी से पहले कौशल्या माँ की एक संतान हैं श्रीराम जी की बहन शांता ! कौशल्या की बहन के कोई संतान नहीं थी इसलिए शांता को उन्हें गोद दे दिया था। राजा दशरथा का कोई उत्तरधिकारी नहीं होने के कारण वे चिंतित थे और इसलिए शांता के पति ऋष्यशृंग मुनि जो पुत्रेष्टि यज्ञ के जानकार हैं उनसे पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया जाता है। अब यहाँ सामान्य बुद्धि की जनता और अपनी सनातन संस्कृति की वैज्ञानिकता को स्वीकार न करने वाला युवा जन इस बात का उपहास करता है कि यज्ञ और खीर से संतान की उत्पत्ति कैसे संभव है? लेकिन विज्ञान भी इस बात को स्वीकार करता है कि एक निश्चित आवृत्ति या फ्रीकुएनसी पर जब ॐ का या मंत्रों का उच्चारण किया जाता है तो साउंड एंनर्जी उत्पन्न होती है जिसके हीलिंग इफ़ेक्ट्स होते हैं। यही पुत्रेष्टि यज्ञ में होता है। जब यज्ञ किया जाता है तो उसका हाविष्य विशेष औषधियों से तैयार किया जात है जिसे आयुर्वेद भी मानता है। हाविष्य में विशेष शक्ति होती है। तो खीर में भी विशेष औषधीय गुण हैं जिससे संतान उत्पत्ति होती है। आज भी ऐसी अनेक आयुर्वेदिक दवाइयाँ हैं जो नाना प्रकार के रोगों का उपचार करने में मदद करती हैं।परम पूजनीया श्री गुरुमाँ डॉ. कविता अस्थाना जी अपनी राम कथा में यह स्पष्ट करती हैं कि श्री राम इक्ष्वाकु वंश का ही इतिहास हैं। श्री पुष्कर भटनागर अपनी पुस्तक में प्लेनेटोरियम सॉफ्टवेयर के आधार पर बताते हैं कि प्रभु श्री राम जी का जन्म 10 जनवरी 5114 हुआ था। वे अपनी पीढ़ी में उनतालीसवें (39 वें) व्यक्ति है। बारहवें मास में चैत्र के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को पुनर्वसु नक्षत्र एवं कर्क लग्न में कौसल्या देवी ने दिव्य लक्षणों से युक्त, सर्वलोक वंदित, जगदीश्वर श्री राम को जन्म दिया। श्री राम जी के जन्मोत्सव की धूमधाम और हर्षोल्लास का वर्णन मंत्र मुग्ध करने वाला था।श्री गुरुमाँ जी ने श्री राम जी की शिक्षा-दीक्षा के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि वाल्मीकिकृत रामायण में श्रीराम जी को स्नातक कहा गया है और वे स्टेट क्राफ़्टशिप, कृषि, मिलिट्री आदि विषयों के ज्ञाता हैं। गुरुकुल में भी श्री राम जी निषाद राज जी गहरी मित्रता थी। तो यह असत्य बात भी खंडित होती है कि राम जी जातिगत भेदभाव मानते थे। श्रीराम जी निरंतर चिंतन करते हैं कि मनुष्य दुखी क्यों है, मोह, प्रेम, वैराग्य क्या है आदि, आदि! योग वशिष्ठ में इसकी चर्चा मिलती है! ऋषि वशिष्ठ द्वारा एक अनुष्ठान हेतु श्री राम और श्री लक्ष्मण को अपने साथ ले जाना, राजा दशरथ का देर से राज़ी होना, गुरु-शिष्य के सम्बन्धों की चर्चा आदि बिन्दुओं को रोचक तरीके से समझाया।

    वे कहती हैं कि वाल्मीकिकृत रामायण के अनुसार सीता का स्वयंवर नहीं हुआ था। श्री राम जी और लक्ष्मण जी धनुष देखना चाहते थे। लोहे के आठ पहियों पर रखे सन्दूक में रखा धनुष उठाकर उस पर प्रत्यंचा चढ़ाने की प्रक्रिया में वह धनुष टूट जाता है। शिर्ध्वज अपनी पुत्री सीता जी को वीर्य शुल्का बताते हैं और कहते हैं कि मैंने यह निश्चय किया था कि जो अपने पराक्रमी इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा उसी से मैं सीता का विवाह करूंगा। वापसी के समय शुभ-अशुभ लक्षण, धनुष तोड़े जाने पर श्री परशुरान जी का क्रुद्ध होना, राजा दशरथ का अपमान करना और तब श्री राम का कुपित होकर परशुराम जी की चुनौती को स्वीकार करना आदि घटनाओं का वर्णन किया जात है। यहाँ यह भ्रांति भी टूटती है कि परशुराम जी से क्रोध से वार्तालाप लक्ष्मण जी ने किया था, श्री राम जी एक कोने में चुपचाप खड़े थे। ऐसा नहीं था। हो भी नहीं सकता था, यह उनके पिता के सम्मान का प्रश्न था।कथा के अंत में के परम पूजनीया श्री गुरुमाँ डॉ. कविता अस्थाना जी आयोजकों और दर्शा दीर्घा में उपस्थित सभी भक्त जनों का हृदय से धन्यवाद देती हैं और कहती हैं अब हमारा दायित्व है कि इस कथा को जन-जन तक पहुंचाएँ, अपने बच्चों को बताएं ताकी सनातन संस्कृति का संरक्षण और संवर्धन हो सके, हम अपने भगवान श्री राम को सही से जान सकें। श्री राम जी अपनी कृपा हम सभी पर बनाए रखें।श्री राम कथा में नन्हें राम भक्त यदुराज के “भाई रे सो गुरु सत्य कहावे, कोई नैनन अलख लगावे” भजन ने ससभी का मन मोह लिया। आश्रम के बच्चे श्री गुरुजी के निर्देशन में यह सब सीख रहे हैं। सुर साधक डॉ. संजय अंडूरकर जी ने “राम भजो आराम ताजो, राम ही जीवन सार सिखाये, राम ही बेडा पार लगाए” भजन पर जो तान लगाई उससे पूरा सभागार राममय हो गया। ख्याति जी और करण जी ने श्री गुरुजी द्वारा रचित और संगीतबद्ध किए गए भजन “न महलों में रहो, ना जंगलों में रहो, मेरा दिल है तो ख़ाली, ऐ मेरे भगवन, तो आओ राम जी, मेरे दिल में रहो!”, “दशरथ नंदन राजा राम, बड़े कृपालु मेरे राम”, “हर घर में अब एक ही नाम, एक ही नारा गूंजेगा, मेरे भारत का बच्चा बच्चा, जय जय श्री राम बोलेगा” “हे हनुमान जी पधारो, मेरी जिव्हा पे विराजो, गाथा राम जी की गाऊँ”, और श्री राम जी के जन्मोत्सव के लिए “आ गये आ गये आ गये, मेरे राम आ गये, आ गये आ गये आ गये, नारायण आ गये” भजन पर सभी आनंदित हो झूमने लगे।श्री राम कथा के अवसर पर अलग-अलग शहरों से आए अनेक गणमान्य अतिथि, आश्रम परिवार के सदस्य उपस्थित थे। इस अवसर पर श्री अतुल गर्ग जी, लोकसभा सांसद, गाज़ियाबाद, श्री अनिल अग्रवाल, जी, पूर्व राज्य सभा सांसद, गाज़ियाबाद, श्री सुनील शर्मा जी, कैबिनेट मंत्री, उत्तर प्रदेश, श्री नरेंद्र कश्यप जी, राज्य मंत्री, स्वतंत्र प्रभार, श्रीमती सुनीता दयाल जी, महापौर, गाज़ियाबाद,, श्री अजीतपाल जी, विधायक, मुरदनगर, श्री दिनेश गोयल जी, शिक्षक स्नातक, विधान परिषद, श्री दिनेश अरोड़ा जी, चेयरमैन, यशोदा हॉस्पिटल की गरिमाय उपस्थिति रही। श्री राम कथा के आयोजकों में सम्मिलित श्री अनिल अग्रवाल जी, श्री अनिल गर्ग जी, श्री आशुतोष गुप्ता जी, श्री गौरव जी, श्रीमती विनीता अग्रवाल जी, श्रीमती कमलेश गर्ग जी, श्रीमती श्वेता गुप्ता जी, श्रीमती प्रेरणा गर्ग जी का सभी राम भक्तों की ओर से साधुवाद!

    Just In Latest news News Top News
    Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Email
    admin
    • Website

    Related Posts

    ऐतिहासिक व्यक्तित्वों में व्यक्तित्व विकार के संकेत: एक शैक्षिक गाइड

    Sponsor: Ankit TiwariJuly 23, 2025

    ग़ाज़ियाबाद के लोहिया नगर में स्थित शुभारंभ द लर्निंग स्कूल ने अपनी पहली वर्षगांठ के उपलक्ष में भव्य उत्सव आयोजित किया

    April 14, 2025

    जिला युवा कांग्रेस कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में बाबा साहेब के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित

    April 14, 2025
    Leave A Reply Cancel Reply

    advertising
    Editors Picks
    Latest Posts

    Subscribe to News

    Get the latest sports news from NewsSite about world, sports and politics.

    Advertisement

    Your source for the serious news. This demo is crafted specifically to exhibit the use of the theme as a news site. Visit our main page for more demos.

    We're social. Connect with us:

    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest YouTube

    Subscribe to Updates

    Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

    Facebook X (Twitter) Instagram Pinterest
    • Home
    • News
    © 2025 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.