
महाकुंभ में कैलाश मानसरोवर शिविर का आयोजन एनआरआई हरि गुप्ता करेंगे मानसरोवर से जुड़े रहस्यों का पर्दाफाश महाकुंभ में एनआरआई हरि गुप्ता द्वारा कैलाश यात्रा शिविर कैलाश मानसरोवर से जुड़ी समस्याओं और रहस्याओं के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए महाकुंभ में एक शिविर का आयोजन किया गया है, जिसमें भारत और विदेश से कई मशहूर हस्तियां अधिकारियों और सफल व्यवसायियों के शामिल होने की उम्मीद है। जिसमें चर्चित भारतीय फिल्म निर्देशक दुष्यंत प्रताप सिंह मौजूद रहेंगे। दुष्यंत प्रताप सिंह अपने बेहतरीन निर्देशन के साथ-साथ पटकथा लेखन के लिए भी मशहूर हैं और साथ ही अमरजीत मिश्रा ट्रस्टी दिव्य प्रेम सेवा मिशन हरिद्वार मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर बॉलीवुड डायरेक्टर दुष्यंत प्रताप सिंह ने कहा कि किसी भी अन्य वासि भारतीयों द्वारा कैलाश मुक्ति अभियान के बैनर तले इतने बड़े अभियान का बीड़ा उठाना अपने आप में ही अद्भुत और बहुत साहस व लगन का विषय है और इस परिप्रेक्ष्य में सारे अन्य वासियों भारतीयों को तकरीबन 15 से 20 अलग-अलग देशों के भारतीयों को एक झंडे तले लाना और अपने सांस्कृतिक विरासत के लिए आध्यात्मिक विरासत के लिए भोलेनाथ शिव के लिए संघर्ष शुरू करना। अपने आप में बहुत ही प्रेरणादायक है यह एक विडम्बना है कि पिछले 5 सालों से भारतीय पासपोर्ट धारकों को मानसरोवर जाने की अनुमति नहीं है जबकि अन्य देशों के नागरिक आसानी से वहां जा सकते हैं। किसी भी सरकार द्वारा किसी भी कारण से हिंदू धर्म की तीर्थ यात्रा को रोकना उचित नहीं है। यह हिंदू शिव भक्तों के मानव अधिकारों के बिल्कुल खिलाफ है जबकि भारत सरकार ने 50 किलोमीटर दूर से कैलाश पर्वत को देखने के लिए कुछ मार्ग बनाए हैं। भले ही यात्रा की अनुमति मिल गई हो लेकिन वास्तविक यात्रा से भारतीय यात्रियों को कोई लाभ नहीं होगा उन्हें अभी भी कैलाश की यात्रा के लिए नेपाल और उसके मार्गों पर निर्भर रहना पड़ता है। हरि गुप्ता दिल्ली से कैलाश के लिए सीधी चार्टर उड़ाने शुरू करने के इच्छुक हैं और एयरलाइन ऑपरेटर से बातचीत कर रहे हैं। दिल्ली से कैलाश तक की केवल 500 किलोमीटर की उड़ान है। आचार्य हरि गुप्ता ने कहा कि कैलाश न केवल हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि यह सिख, जैन और बौद्धों के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पहले जैन गुरु ऋषभदेव ने भी कैलाश की यात्रा की थी आचार्य हरि गुप्ता को भोलेनाथ ने कई रहस्य बताएं जैसे पांच कैलाश है जिनमें भोलेनाथ की अलग-अलग लीलाएं हैं। यह अदभुत शिव मंदिर पास के शहर में पहाड़ पर है और सीढ़ियां चढ़कर पहुंचा जा सकता है। इसके एक तरफ पानी का झरना है इसकी परिक्रमा के चारों ओर गहरी घाटी है। कुछ साल पहले कैलाश की यात्रा करने वाले संजय जैन ने उन्हें मानसरोवर लाल के बारे में कुछ रहस्य भी बताएं हैं। उन्होंने बताया कि मानसरोवर झील में कई पत्थर है जिन पर ओम सांप या डमरू के प्राकृतिक निशान हैं। दूसरा रहस्य है कि मानसरोवर ताल के पास पक्षी किसी से भी भोजन ले लेते हैं जबकि राक्षस ताल के पास पक्षी कोई भी भोजन स्वीकार नहीं करते। यह जानकर आश्चर्य होता है कि यहां दो ताल है एक में मीठा और साफ पानी है जबकि दूसरे में वह नहीं है एक में लहरें हैं और दूसरे में नहीं एक बर्फ में जम जाता है जबकि दूसरा नहीं। भोलेनाथ द्वारा दी गई एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि यह है कि जब हम गूगल मैप को 180 डिग्री घुमाते हैं तो हम झीलों के आकार को शिवलिंग और योनि के रूप में पहचान सकते हैं। भोलेनाथ की प्रेरणा से उन्होंने जय कैलाश नाम से भजन भी लिखा है जिसमें भगवान शिव कैलाश पर्वत और उसके महत्व के बारे में आसानी से बताया गया है। कैलाश आने वाले कई लोगों ने बताया कि मानसरोवर और उसके आसपास के स्थान पर तीर्थयात्रियों के ठहरने शौचालय चिकित्सा और यात्रा के लिए शायद ही कोई सुविधा है आचार्य गुप्ता को पूरा विश्वास है कि यह काम जल्दी पूरा हो जाएगा क्योंकि इस आंदोलन का मार्गदर्शन स्वयं भोलेनाथ कर रहे हैं वह सभी शिव भक्तों मीडिया अधिकारियों और राजनेताओं से अपील कर रहे हैं कि इस बारे में आवाज़ उठाएं और इसे जल्द से जल्द हल करने के लिए मिलकर काम करें ? ताकि सुबह भक्त बिना किसी प्रतिबंध भय या परेशानी के पवित्र स्थान की यात्रा करके अपने इष्ट देव की पूजा से आध्यात्मिक लाभ उठाएं।

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